चिरमिरी में ‘ॐ साईं नाथ महिला स्वयं सहायता समूह’ पर कार्रवाई क्यों अटकी?
खाद्य अधिकारी के पत्र के बाद भी निरस्तीकरण नहीं — सवालों के घेरे में प्रशासन

चिरमिरी। शहर में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। “ॐ साईं नाथ महिला स्वयं सहायता समूह” की संचालक नीता डे के खिलाफ नियम विरुद्ध कार्य किए जाने की शिकायतों के बाद खाद्य अधिकारी ने दिनांक 24/09/2024 को एसडीएम को पत्र लिखकर संस्था के नियमानुसार निरस्तीकरण की मांग की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी न तो दुकान का लाइसेंस निरस्त हुआ और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने आई।

आखिर कार्रवाई क्यों ठप?
सूत्रों के अनुसार जांच में नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी, जिसके बाद खाद्य विभाग ने स्पष्ट रूप से निरस्तीकरण की अनुशंसा की। सवाल यह है कि जब विभागीय अधिकारी स्वयं कार्रवाई की सिफारिश कर चुके हैं, तो फिर प्रशासनिक स्तर पर फाइल आगे क्यों नहीं बढ़ रही?
क्या सत्ता का संरक्षण?

स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि कहीं न कहीं “ऊपर” से संरक्षण मिलने के कारण यह कार्रवाई अटकी हुई है। क्या शासन सत्ता में बैठे कुछ प्रभावशाली लोग इस कार्रवाई को रोक रहे हैं? अगर नहीं, तो फिर देरी की असली वजह क्या है?
पारदर्शिता पर सवाल
जब आम नागरिकों या छोटे दुकानदारों के खिलाफ मामूली अनियमितता पर त्वरित कार्रवाई हो जाती है, तो इस मामले में चुप्पी क्यों? क्या नियम सबके लिए बराबर नहीं हैं?

जनता अब जानना चाहती है—
खाद्य अधिकारी के पत्र पर अब तक क्या कार्यवाही हुई?
एसडीएम कार्यालय में फाइल की वर्तमान स्थिति क्या है?
निरस्तीकरण में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है?
जवाबदेही तय हो
यह मामला केवल एक स्वयं सहायता समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का भी प्रश्न है। यदि जांच में नियम विरुद्ध कार्य सिद्ध हुआ है, तो नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि आरोप गलत हैं, तो सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या आने वाले दिनों में इस मामले में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या फिर यह फाइल भी सरकारी दफ्तरों की धूल फांकती रह जाएगी?

(यह खबर उपलब्ध दस्तावेजों और स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)




