छत्तीसगढ़

*चिरमिरी में फिर धधक उठा कोयले का काला कारोबार,19 ईंट भट्टों पर कार्रवाई के बाद भी बेखौफ माफिया,

कार्रवाई सिर्फ ‘खाना-पूर्ति’ बनकर रह गई?

चिरमिरी,एमसीबी(छत्तीसगढ़)
चिरमिरी क्षेत्र में कोयले का काला कारोबार एक बार फिर पूरे शबाब पर नजर आ रहा है। अवैध खनन से निकाले गए कोयले की खुलेआम खपत ज्यादातर अवैध ईंट भट्टों में की जा रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं।
हाल ही में खनिज विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने 19 अवैध ईंट भट्टों पर कार्रवाई की थी, लेकिन यह कार्रवाई अवैध कारोबारियों के लिए डर नहीं, बल्कि मज़ाक बनकर रह गई।

कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जुर्माना!
सूत्रों की मानें तो अवैध कोयला कारोबारी अब यह भली-भांति समझ चुके हैं कि“ज्यादा से ज्यादा क्या होगा?थोड़ा-बहुत जुर्माना लगेगा, जो हम भर देंगे।”

यही वजह है कि कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद अवैध कोयले की सप्लाई फिर से शुरू हो गई, और कारोबारी सीना तानकर शासन-प्रशासन के सामने से निकल रहे हैं।

बड़े मगरमच्छ सुरक्षित, छोटे मोहरे निशाने पर स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार की तरह इस बार भी
बड़े अवैध कारोबारी बच निकले
छोटे-मोटे ईंट भट्टों पर ही कार्रवाई दिखाकर फाइल बंद कर दी गई
क्या यही वजह है कि अवैध खनन और कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही?

प्रशासनिक सख्ती सिर्फ कागज़ों में? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अवैध कोयले की खपत खुलेआम हो रही है जब ईंट भट्टों तक कोयला पहुंच रहा है

जब विभागों को सब पता है
तो फिर अब तक किसी बड़ी मछली पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब जरूरत है ‘बड़ी कार्रवाई’ की*क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का साफ कहना है कि*

*“जब तक अवैध कारोबारियों पर एफआईआर,वाहन जब्ती,*
*भट्टों की सीलिंग और*
*लाइसेंस रद्द करने जैसी*
*कड़ी कार्रवाई नहीं होगी* ,
*तब तक यह काला कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा।”*

*सवालों के घेरे में सिस्टम*
*क्या खनिज विभाग की कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता है?*

*क्या अवैध कोयला कारोबारियों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?*

*क्या चिरमिरी में कानून का डर खत्म हो चुका है?*

*अब देखना यह होगा कि*
*शासन-प्रशासन इस खबर को गंभीरता से लेता है या*
*एक और कार्रवाई सिर्फ फाइलों में दफन होकर रह जाती है।*

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