छत्तीसगढ़

कोल डस्ट की आड़ में हो रहा है कोयले का काला कारोबार।

काले धंधे पर सफेद “डस्ट” की चादर! चिरमिरी में कोल डस्ट की आड़ में धधक रहा है अवैध कोयले का कारोबार

चिरमिरी। शहर और आसपास के इलाकों में इन दिनों कोल डस्ट के नाम पर कोयले का काला कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। अवैध कारोबारी “राखड़” और “डस्ट” की आड़ लेकर ट्रकों में भर-भरकर कोयला सप्लाई कर रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो चिरमिरी पुलिस को कुछ दिख रहा है और न ही खनिज विभाग को!


सबसे बड़ा सवाल—
👉 आखिर यह कोयला आ कहां से रहा है?
👉 किसके संरक्षण में रातों-रात ईंट भट्टों की संख्या बढ़ी?
👉 और क्यों जिम्मेदार विभागों की नजर इस धुएं में धुंधली पड़ गई है?
ईंट भट्टों की बढ़ती तादाद, काला धंधा तेज
क्षेत्र में अवैध ईंट भट्टों की संख्या पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इन्हीं भट्टों को “राखड़” के नाम पर कोयले की सप्लाई की जा रही है।

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह कोयला या तो अवैध उत्खनन से आ रहा है या फिर South Eastern Coalfields Limited (एसईसीएल) की खदानों से चोरी कर बाहर निकाला जा रहा है।
यदि यह सच है तो यह सिर्फ राजस्व का नुकसान नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।
पुलिस और खनिज विभाग की खामोशी क्यों?


खुलेआम ट्रकों की आवाजाही, रात के अंधेरे में लोडिंग-अनलोडिंग और भट्टों से उठता धुआं… इसके बावजूद कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह सब “सेटिंग” का खेल है?


कहीं ऐसा तो नहीं कि कोल माफिया “डस्ट” के साथ-साथ जिम्मेदारों की आंखों में भी डस्ट झोंक रहे हैं?
जनता पूछ रही जवाब
चिरमिरी की जनता अब जानना चाहती है—
अवैध उत्खनन पर कब लगेगा अंकुश?
चोरी के कोयले की सप्लाई पर कौन करेगा कार्रवाई?
और इस पूरे नेटवर्क के पीछे असली चेहरे कौन हैं?
अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह काला कारोबार क्षेत्र की कानून व्यवस्था और पर्यावरण—दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग नींद से कब जागते हैं और कोल डस्ट के इस काले खेल पर कब तक पड़ता है ताला।

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