छत्तीसगढ़
डोमनहिल जच्चा-बच्चा अस्पताल में आखिर कौन चला रहा है व्यवस्था?
14 साल से एक ही फार्मासिस्ट का दबदबा, डॉक्टर आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन जी.डी. हुसैन क्यों जमे हैं?

चिरमिरी। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्ष 2012 में डोमनहिल जच्चा-बच्चा अस्पताल की स्थापना माताओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। बीते 14 वर्षों में इस अस्पताल में कई चिकित्सकों की नियुक्ति हुई, कई आए और कई चले गए, लेकिन एक नाम ऐसा है जो शुरुआत से लेकर आज तक अस्पताल में लगातार बना हुआ है—फार्मासिस्ट जी.डी. हुसैन।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है जिसके कारण जिले के अन्य अस्पतालों में फार्मासिस्टों के तबादले होते रहे, लेकिन डोमनहिल अस्पताल में पदस्थ जी.डी. हुसैन का एक बार भी स्थानांतरण नहीं हुआ?

डॉक्टर बदलते रहे, लेकिन व्यवस्था नहीं बदली?
सूत्रों और अस्पताल में पूर्व में कार्य कर चुके कुछ चिकित्सकों से चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि अस्पताल में कार्य करने के लिए एक अलग ही व्यवस्था का पालन करना पड़ता है। कुछ पूर्व चिकित्सकों का दावा है कि अस्पताल में फार्मासिस्ट जी.डी. हुसैन का प्रभाव इतना अधिक है कि कई बार डॉक्टरों को भी उनकी बनाई कार्यशैली के अनुसार काम करना पड़ता है।
इन दावों के अनुसार जो चिकित्सक इस व्यवस्था के अनुरूप काम करते हैं, वे टिक जाते हैं, जबकि स्वतंत्र रूप से कार्य करने की कोशिश करने वालों के लिए परिस्थितियां कठिन हो जाती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
क्या फार्मासिस्ट निभा रहे डॉक्टर की भूमिका?
अस्पताल को लेकर एक और गंभीर सवाल उठ रहा है। स्थानीय लोगों और कुछ सूत्रों का आरोप है कि कई बार फार्मासिस्ट जी.डी. हुसैन मरीजों को दवाइयों के संबंध में ऐसी सलाह देते दिखाई देते हैं, जो सामान्यतः चिकित्सक के अधिकार क्षेत्र में आती है।
यदि वास्तव में कोई फार्मासिस्ट अपने निर्धारित दायरे से बाहर जाकर मरीजों के उपचार संबंधी निर्णय ले रहा है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन माना जाएगा बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर विषय हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी मरीज को गलत दवा या गलत सलाह के कारण नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
आखिर वर्ष 2012 से अब तक जी.डी. हुसैन का स्थानांतरण क्यों नहीं हुआ?
क्या विभाग के पास इसके पीछे कोई विशेष कारण है?
क्या अस्पताल की कार्यप्रणाली की कभी निष्पक्ष जांच कराई गई?
क्या डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों से गोपनीय रूप से फीडबैक लिया गया?
क्या फार्मासिस्ट द्वारा कथित रूप से डॉक्टर की भूमिका निभाने की शिकायतों की जांच हुई?
जांच की मांग तेज
अब आवश्यकता इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग इन सभी आरोपों और सवालों की निष्पक्ष जांच कराए। यदि आरोप गलत हैं तो सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए और यदि आरोपों में दम है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि यह मामला किसी कार्यालय या प्रशासनिक व्यवस्था का नहीं, बल्कि माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, जहां किसी भी प्रकार की लापरवाही या मनमानी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
अब सबकी निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि वह इन सवालों का जवाब देता है या फिर डोमनहिल अस्पताल में उठ रहे ये सवाल यूं ही गूंजते रहेंगे।





