चिरमिरी के ‘साहब’ को रास नहीं आ रहा सरकारी बंगला, जेट हॉस्टल में जमाया डेरा!
उप-शीर्षक: नियमों को ताक पर रखकर मुफ्त की रोटियां तोड़ रहे रेंजर टीकम सिंह ठाकुर; विभाग मौन।

चिरमिरी। सरकारी नियमों की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण चिरमिरी वन परिक्षेत्र में देखने को मिल रहा है। जब से नए वन परिक्षेत्र अधिकारी (Ranger) टीकम सिंह ठाकुर ने कार्यभार संभाला है, तब से वे जनता की सेवा करने के बजाय अपनी सुख-सुविधाओं को लेकर चर्चा में हैं। आलम यह है कि साहब को विभाग द्वारा आवंटित सरकारी आवास ‘पसंद’ नहीं आ रहा, जिसके चलते उन्होंने डोमनहिल स्थित जेट हॉस्टल को ही अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है।

पसंद नहीं आया सरकारी बंगला, हॉस्टल में ‘शाही’ ठाट
सूत्रों के मुताबिक, टीकम सिंह ठाकुर को चिरमिरी का प्रभार ग्रहण किए लगभग एक महीना बीत चुका है। नियमानुसार, किसी भी अधिकारी को पदभार ग्रहण करने के 7 से 15 दिनों के भीतर अपने आवंटित सरकारी आवास में शिफ्ट होना अनिवार्य होता है। लेकिन यहाँ तो गंगा ही उल्टी बह रही है। बताया जा रहा है कि साहब को वन विभाग की आवासीय कॉलोनी और रेंजर के लिए निर्धारित मकान उनके ‘स्टैंडर्ड’ के मुताबिक नहीं लगा, इसलिए उन्होंने आलीशान सुविधाओं वाले जेट हॉस्टल में ही जमे रहना बेहतर समझा।
नियमों की सरेआम अनदेखी
विभागीय गाइडलाइंस की मानें तो सरकारी आवास खाली होने की स्थिति में अधिकारी का किसी हॉस्टल या गेस्ट हाउस में लंबे समय तक रुकना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ भी है। लेकिन साहब को शायद नियमों की परवाह नहीं है। सवाल यह उठता है कि क्या रेंजर साहब के लिए सरकारी नियम मायने नहीं रखते? या फिर प्रशासन ने उन्हें ‘विशेष छूट’ दे रखी है?
”जब रक्षक ही नियमों का भक्षक बन जाए, तो व्यवस्था किससे उम्मीद करे? सरकारी आवास को ठुकराकर हॉस्टल में मुफ्त की रोटियां तोड़ना शासकीय मर्यादा के खिलाफ है।”
जनता में आक्रोश, विभाग खामोश
चिरमिरी की जनता और जागरूक नागरिकों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर साहब कब तक ‘अतिथि’ बनकर रहेंगे? एक तरफ सरकार फिजूलखर्ची रोकने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी अपनी मनमर्जी से सरकारी संसाधनों का निजी सुख के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि खबर सुर्खियां बनने के बाद उच्च अधिकारी नींद से जागते हैं या टीकम सिंह ठाकुर की यह ‘हॉस्टल वाली हठ’ इसी तरह जारी रहती है।




