
चिरमिरी | बुधवार, 8 अप्रैल 2026
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती शहर की ‘लाइफलाइन’: मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना पर शिकायतों का ‘ब्रेकर’
चिरमिरी। नगर पालिक निगम चिरमिरी के गलियारों में इन दिनों फाइलों की सरसराहट से ज्यादा भ्रष्टाचार की चर्चाएँ गर्म हैं। शहर की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना—सोनावनी नाका (डोमनहिल) से कोरिया होते हुए पं. दीनदयाल उपाध्याय चौक (पोड़ी) तक प्रस्तावित बायपास सड़क—अब निर्माण से पहले ही विवादों के गड्ढों में गिर गई है। करोड़ों की इस निविदा (Tender) में ‘धांधली’ की ऐसी बू आ रही है कि इसकी गूँज अब सीधे राजधानी के प्रशासनिक गलियारों तक पहुँच गई है।

*आखिर क्या है ‘आयुष फ्लाई एश’ की वह शिकायत?*
विवाद का केंद्र 25 फरवरी 2026 को दर्ज कराई गई वह शिकायत है, जिसने विभाग की नींद उड़ा दी है। आयुष फ्लाई एश ब्रिक्स इंडस्ट्रीज द्वारा दर्ज इस शिकायत में निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधा प्रहार किया गया है।
शिकायत के मुख्य बिंदु:
पसंदीदा ठेकेदार को लाभ: निविदा की शर्तों को इस तरह मरोड़ा गया कि वह किसी खास फर्म के पक्ष में झुकती नजर आ रही हैं।
नियमों की अनदेखी: टेंडर प्रक्रिया के दौरान छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम के मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) के उल्लंघन का आरोप।
प्रस्तावों में विरोधाभास: अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच भेजे गए तीन अलग-अलग प्रस्तावों में तकनीकी मापदंडों का बार-बार बदला जाना।
*शासन का हंटर:* आयुक्त का ‘अल्टीमेटम’ और निगम में खलबली
शिकायत के बाद शासन ने इसे महज एक कागजी कार्यवाही मानकर ठंडे बस्ते में नहीं डाला है। उच्च स्तर से आयुक्त ने नगर पालिक निगम चिरमिरी को एक बेहद सख्त पत्र जारी किया है। शासन के इस कड़े रुख ने निगम के आला अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं।

आयुक्त के निर्देश के 3 कड़े स्तंभ:
विस्तृत जाँच: 25 फरवरी की शिकायत के हर एक बिंदु पर तथ्यात्मक जाँच की जाए।
दस्तावेजों का मिलान: पिछले 5 महीनों (अक्टूबर से फरवरी) के दौरान भेजे गए तीन प्रस्तावों की फाइलें फिर से खोली जाएं और यह स्पष्ट किया जाए कि बार-बार प्रस्ताव क्यों बदले गए।
जवाबदेही तय हो: जाँच रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की लीपापोती पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर सीधी गाज गिरना तय है।
*बड़ा सवाल: विकास या व्यक्तिगत लाभ?*
यह बायपास सड़क चिरमिरी के लिए कोई सामान्य सड़क नहीं है; यह शहर के यातायात के दबाव को कम करने वाली ‘लाइफलाइन’ है। लेकिन विभागीय खींचतान और ‘ठेका’ विवाद ने इसे अधर में लटका दिया है।
”क्या मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना में पारदर्शिता को ताक पर रखा गया? आखिर क्यों बार-बार प्रस्तावों में संशोधन किए गए? क्या निगम के भीतर कोई ‘सिंडिकेट’ काम कर रहा है जो विकास की कीमत पर अपनी जेबें भरना चाहता है?” — शहर के प्रबुद्ध नागरिकों का सवाल
*जाँच के घेरे में ‘तीन प्रस्ताव’*
विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे ज्यादा पेंच उन तीन प्रस्तावों में फंसा है जो पिछले कुछ महीनों में भेजे गए।
प्रथम प्रस्ताव (अक्टूबर 2025): प्रारंभिक अनुमान और शर्तें।
द्वितीय प्रस्ताव (दिसंबर 2025): शर्तों में अचानक बदलाव।
तृतीय प्रस्ताव (फरवरी 2026): शिकायत से ठीक पहले भेजा गया संशोधित ड्राफ्ट।
इन तीनों प्रस्तावों के बीच का अंतर ही इस पूरे ‘खेल’ की असलियत को बेनकाब करेगा।
*जनता की उम्मीदों पर फिरता पानी*
चिरमिरी की जनता लंबे समय से इस बायपास का इंतजार कर रही है ताकि धूल, जाम और भारी वाहनों के शोर से निजात मिल सके। लेकिन ‘भ्रष्टाचार’ और ‘शिकायत’ के इस मोड़ ने फिलहाल सड़क के काम पर ब्रेक लगा दिया है। अब सबकी नजरें निगम के उस प्रतिवेदन पर टिकी हैं, जो शासन को भेजा जाना है।
क्या निगम अपनी साख बचा पाएगा या जाँच की आंच में बड़े चेहरे झुलसेंगे? यह तो वक्त ही बताएगा। हम इस मामले की हर बारीकी पर नजर बनाए हुए हैं।




