
गंगापुर में युवतियों के लिए दुकान हटी, लेकिन छिंदडांड में अब तक नहीं हुई कार्रवाई
अंबिकापुर के गंगापुर में पंजीयन कार्यालय के पास संचालित शराब दुकान को स्थानीय लोगों और युवतियों की असुविधा को देखते हुए हाल ही में प्रशासन ने विस्थापित कर दिया। यह कदम सराहनीय रहा, क्योंकि इससे न केवल क्षेत्र का माहौल सुधरा बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता भी दिखी।

लेकिन ठीक इसी तरह का मामला कोरिया ज़िले के छिंदडांड में भी है, जहाँ मार्गदर्शन शैक्षणिक संस्थान के बिलकुल पास संचालित शासकीय शराब दुकान तमाम शिकायतों और विरोधों के बावजूद अब तक नहीं हटाई गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह शराब दुकान छात्राओं और महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन गई है। विद्यालय और कोचिंग में पढ़ने आने-जाने वाली युवतियाँ रोज़ाना असहज माहौल का सामना करती हैं। दुकान के आस-पास नशे में धुत लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे छात्राओं को असुरक्षा महसूस होती है।

अभिभावकों ने कई बार प्रशासन से मांग की कि संस्थान के पास से शराब दुकान हटाई जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
लोगों का सवाल साफ है — जब अंबिकापुर के गंगापुर में महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दुकान तुरंत विस्थापित कर दी गई, तो छिंदडांड में ऐसी ही स्थिति होने के बावजूद प्रशासन चुप क्यों है?
सबसे बड़ी बात यह है कि ज़िले की कलेक्टर स्वयं एक महिला अधिकारी हैं, इसके बावजूद छात्राओं की समस्या को अनदेखा किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि महिला सशक्तिकरण के नारे तभी सार्थक होंगे जब ज़मीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाई जाए।
स्थानीय समाजसेवी संगठनों और अभिभावकों ने एक स्वर में मांग की है कि मार्गदर्शन शैक्षणिक संस्थान से सटी शराब दुकान को तत्काल विस्थापित किया जाए, ताकि छात्राओं को सुरक्षित व सम्मानजनक वातावरण मिल सके।
फिलहाल प्रशासन की खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है —
क्या प्रशासन किसी दबाव में है या फिर यह मुद्दा उसकी प्राथमिकता में ही नहीं?
🗣️ स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया:
“छात्राओं की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता, फिर भी प्रशासन मौन है।”
— स्थानीय नागरिक, छिंदडांड
“जहाँ बच्चियाँ पढ़ती हैं, वहाँ शराब दुकान होना बेहद शर्मनाक है।”
— अभिभावक, मार्गदर्शन संस्थान




